商品簡介
जब शब्द अथाह हुए, मुस्कान ने सुनाई वो अनकही मन की किताब, और वही कविता बन गई - ज़िंदगी --- रिश्तों की उलझन, स्त्री मन की अनकही पीड़ा, जीवन के अनुभवों की गहराई और संवेदनाओं की सुगंध से सजा यह काव्य-संग्रह हर पाठक को अपने ही जीवन के किसी न किसी पल से अवश्य जोड़ देगा। --- बस यूँ ही न कोई शोर, न कोई दिखावा... बस जीवन के रंग, पलों की धूप-छाँव, रिश्तों की गर्माहट, यादों की नर्मी और मन की अनकही अनुभूतियाँ। इन कविताओं में जीवन के अनेक रंग हैं- कहीं मुस्कान, कहीं पीड़ा, कहीं प्रतीक्षा, कहीं अपनापन। --- आइए... कुछ पल ठहरिए, बस यूँ ही पन्ने पलटिए, और जो शब्द आपके मन को छू जाएँ, उन्हें अपना बना लीजिए।