商品簡介
"शून्य और मैं" आत्मा की उस यात्रा का काव्यात्मक दस्तावेज़ है, जहाँ शून्यता कोई अभाव नहीं, बल्कि स्वयं से मिलने का द्वार बन जाती है। यह कविता-संग्रह मौन, रिक्तता, टूटन, प्रेम और आत्मबोध के बीच बहती संवेदनाओं को शब्द देता है। इन कविताओं में "मैं" धीरे-धीरे मिटता है और उसी शून्य के भीतर अपना वास्तविक अस्तित्व खोज लेता है। सरल भाषा, गहरे भाव और विचारशील प्रतीकों के साथ यह पुस्तक पाठक को ठहरने, सोचने और स्वयं को महसूस करने का अवसर देती है। शून्य और मैं उन पाठकों के लिए है जो शब्दों में शोर नहीं, अर्थ ढूँढते हैं; जो जानते हैं कि कभी-कभी शून्य में उतरना ही स्वयं तक पहुँचने का सबसे सच्चा रास्ता होता है।