商品簡介
मैंने 'तवाज़ुन' (संतुलन) की तरफ़ ध्यान रखते हुए कुल मिलाकर इक्कीस कविताएँ लिखीं है। इन कविताओं में, मैंने अतिवाद (इफ़रात) एवं उदारवाद (तफ़रीत) का प्रतिरोध किया, और प्रकाश-छाया, आशा-शंका, क्रिया-प्रतिक्रिया को नपी-तुली अनुपातिकता में साथ-साथ रहने दिया। तवाज़ुन में मेरे शब्दों के चयन, मेरे ठहराव (विराम), और मेरे अंत को निर्देशित किया, मुझे यह याद दिलाते हुए कि अर्थ अति या उदार होने से नहीं बल्कि सामंजस्य (संतुलन) से निकलता है, और कविता, जीवन की तरह, अपना सत्य तब पाती है जब हर भावना को उसका सही वज़न दिया जाता है। इफ़रात-ओ-तफ़रीत इस मुहावरे का अर्थ है संतुलन खो देना-या तो बहुत ज्यादा करना या बहुत कम करना।