商品簡介
यह काव्य-संग्रह ज्ञान के उस पवित्र आरोहण की कहानी है, जहाँ हम मूलाधार चक्र (ह्रस्व) से सहस्रार चक्र (दीर्घ) तक की यात्रा करते हैं। यह स्थूल शरीर से ब्रह्म तक के मिलन का प्रतीक है। शब्द स्वयं ब्रह्म हैं, इसलिए मेरे विचारों का प्रकटीकरण बनकर ये शब्द पाठकों तक पहुँचने का माध्यम बने हैं। प्रत्येक चक्र को तीन कविताएँ समर्पित हैं, प्रारंभिक, मध्यवर्ती और अंतिम चरण। ये तीन चरण अगले चक्र की ओर आरोहण का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस प्रकार सात चक्रों के लिए इक्कीस कविताएँ रची गई हैं। कविता को माध्यम चुनने का एकमात्र कारण था शब्द, छंद और भाषा का सम्मान करना। शब्दों को उनका पूरा गौरव वापस लौटाने के लिए, और चरणों तथा भावों के माध्यम से पाठक के हृदय तक पहुँचाने के लिए इसे अभिव्यक्ति का रूप दिया गया है।