商品簡介
काली मेरे प्राणों की पुकार मेरे लिए सिर्फ कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि माँ काली के प्रति एक संतान के मिले-जुले भावों की ईमानदार अभिव्यक्ति है। इन कविताओं में कभी अटूट श्रद्धा है, तो कभी प्रश्न और तड़प। कभी माँ से दूरी का अनुभव है, तो कभी उनकी निरंतर उपस्थिति का शांत भरोसा। यह पुस्तक किसी निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए नहीं लिखी गई, बल्कि उस यात्रा को शब्द देती है जो भक्ति, संशय और समर्पण के बीच लगातार चलती रहती है। यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जिनके हृदय में माँ काली के प्रति श्रद्धा है,और जो भक्ति को आडंबर नहीं, अनुभव के रूप में महसूस करना चाहते हैं।यदि आपके हृदय में माँ काली के प्रति श्रद्धा है, तो संभव है इन पन्नों में आप अपने ही भावों की झलक पाएँ।